कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भाजपा का दामन थामा, अपनी पार्टी का भी किया विलय
कैप्टन अमरिंदर सिंह

पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भाजपा का दामन थाम लिया। साथ ही उन्होंने अपनी पार्टी पंजाब लोक कांग्रेस का भी भाजपा के साथ विलय कर दिया। कैप्टन अमरिंदर सिंह ने केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, किरण रिजिजू, भाजपा नेता सुनील जाखड़ और भाजपा के पंजाब मुखिया अश्विनी शर्मा की मौजूदगी में भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। इस दौरान केंद्रीय मंत्रियों ने उन्हें बुके देकर और माला पहनाकर स्वागत किया। पूर्व कांग्रेसी और पंजाब एसेंबली के डिप्टी स्पीकर अजायब सिंह भट्टी ने भी भाजपा ज्वॉइन कर लिया। 

दो बार पंजाब के मुख्यमंत्री और तीन बार पंजाब कांग्रेस के प्रधान रहे कैप्टन अमरिंदर सिंह को कृषि मंत्री नरेंदर तोमर और किरण रिजिजू ने पार्टी ज्वाइन करवाई। कैप्टन ने अपनी पार्टी पंजाब लोक कांग्रेस जिसका गठन 2021 में किया गया था, इसका भी भाजपा में विलय किया।

सितंबर 2021 में मुख्यमंत्री पद से हटाए जाने के बाद कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा दे दिया था। राजनीति में 52 वर्षों का अनुभव रखने वाले कैप्टन के भाजपा में शामिल होने से जहां भारतीय जनता पार्टी का पंजाब में आधार बढ़ेगा, वहीं कांग्रेस को झटका लगा है।

पूर्व स्पीकर अजायब सिंह भट्टी, कैप्टन की पुत्री जय इंदर कौर, कैप्टन के खास भरत इंदर चाहल, टीएस शेरगिल, मेजर अमरदीप, कैप्टन के पुत्र रण इंदर सिंह, अमरीक सिंह आहलीवाल पूर्व सांसद, पूर्व विधायक हरचंद कौर, पूर्व सांसद केवल सिंह ने भी भाजपा ज्वाइन की है। नरेंदर तोमर ने कैप्टन को पार्टी सदस्यता की पर्ची दी।

कृषि मंत्री नरेंदर तोमर ने कहा कि पहले से ही कैप्टन अमरिंदर सिंह और भाजपा की सोच मिलती है, क्योंकि भाजपा की भी नीति है कि पहले राष्ट्र बाद में पार्टी। कैप्टन हमेशा से ही राष्ट्रवादी सोच के मालिक रहे हैं। उन्होंने राष्ट्र को पहले और फिर पार्टी को बाद में रखा। उन्होंने कहा कि कैप्टन का भाजपा में आना इस बात के संकेत है वह कि पंजाब में शांति व सुरक्षा के पक्षधर हैं।

पंजाब विधानसभा चुनाव भी कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भारतीय जनता पार्टी के साथ मिलकर लड़ा था, लेकिन चुनाव में गठबंधन बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाया। कैप्टन की पार्टी एक भी सीट पर जीत दर्ज नहीं कर सकी थी। खुद कैप्टन अमरिंदर सिंह अपना चुनाव भी हार गए थे। इसके बाद कैप्टन कुछ समय के लिए राजनीति से दूर हो गए, लेकिन एक बार फिर कैप्टन सक्रिय हुए हैं। 

 

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