China Tibet Issue: तिब्बत पर अपने गलत दावे को सही ठहराने के लिए किताबों का सहारा ले रहा चीन, कर रहा युवाओं का Mind Wash
China Tibet Issue: तिब्बत पर अपने गलत दावे को सही ठहराने के लिए किताबों का सहारा ले रहा चीन, कर रहा युवाओं का Mind Wash

चीन ने तिब्बत पर अपने दावे को दोहराने के साथ ही इसे न्यायोचित ठहराने के लिए अब किताबों का सहारा लेना शुरू कर दिया है। इसके जरिये वह तिब्बत पर अपने गलत दावे को सही ठहराने की कोशिश कर रहा है। उसका कहना है कि तिब्बत हमेशा से चीन का हिस्सा रहा है। तिब्बत राइट्स कलेक्टिव की रिपोर्ट के अनुसार, चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग की लिखित पुस्तकों, जिसमें तिब्बत के इतिहास को चीनी नजरिये से पेश किया गया है, के विभिन्न भाषाओं के संस्करणों को चीनी कम्युनिस्ट पार्टी प्रकाशित कराकर वितरित कर रही है।

युवाओं का Mind Wash करने की चीन की अनोखी पहल


इसके जरिये वह तिब्बत के इतिहास के अपने नजरिये को युवाओं के मस्तिष्क में भर देना चाहती है। कुछ रिपोर्ट में कहा गया है कि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा अनुमोदित 'एन्साइक्लोपीडिया आफ इथनिक यूनिटी एंड प्रोगेस (तिब्बत संस्करण)' को चीन तिब्बत के स्कूलों और कालेजों में प्रस्तुत करना चाहता है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी पुस्तक के कई भाषाओं में सस्करण प्रकाशित और वितरित करने के प्रयास में है। इसके तहत रूसी, फ्रेंच, स्पेनिश और जापानी में यह अनूदित हो चुकी है। तिब्बत राइट्स की रिपोर्ट के अनुसार, संयुक्त राष्ट की मानवाधिकार की प्रमुख मिशेल बचलेट जब चीन की यात्रा पर गई थीं, तो उन्हें राष्ट्रपति शी चिनफिंग लिखित यह पुस्तक दी गई थी, जिसमें मानवाधिकार और उसकी इमेज पर सवाल खड़े किए गए हैं। उल्लेखनीय है कि चीन दावा करता है कि तिब्बत हमेशा से चीन का हिस्सा रहा है, जबकि ऐतिहासिक दस्तावेज सिद्ध करते हैं कि तिब्बत स्वतंत्र देश रहा है और उसका अलग झंडा और सेना रही है।


 

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